हिंदी भाषा नही , संस्कृति है हमारी-
प्रो रामसुधार सिंह पिंडरा
यूपी कॉलेज के प्रोफेसर व साहित्यकार डॉ रामसुधार सिंह ने कहाकि हिंदी एक भाषा नही बल्कि हमारी संस्कृति है।
हिंदी उत्थान से ही हम सब समृद्ध होंगे। आज के पीढ़ी को अपने भाषा के इतिहास को जरूर जानना चाहिए।
उक्त बातें शनिवार को पिंडरा स्थित महारानी गुलाब कुँवरि महिला पीजी कॉलेज में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्यातिथि कही। उन्होंने कहाकि हमारी संस्कृति विश्व की सबसे समृद्ध संस्कृत है। इसके विकास में हिंदी का बहुत योगदान है। इसकी व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विश्व के हर कोने में हिंदी समझने व बोलने वाले लोग मिल जाएंगे।
प्रो रामसुधार सिंह ने कहाकि किसी भी देश की पहचान उसकी संस्कृति और परम्परायें होती है। उनको जीवित रखने की जिम्मेदारी भावी पीढ़ी को होती है और उसमे महिला की प्रमुख भूमिका होती है। क्योंकि एक महिला ही किसी बच्चे की प्रथम गुरु होती है। उन्होंने उपस्थित छात्राओं का आह्वान किया कि वह देश की संस्कृति व हिंदी के समृद्धि का प्रतीक बने। जिससे यह विश्व की प्रमुख भाषा बने।
इसके पूर्व कॉलेज के संस्थापक पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह व माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर अतिथियों ने नमन किया। स्वागत भाषण प्राचार्या छाया पाठक , संचालन प्रवक्ता डॉ विजया मिश्रा व धनयवाद ज्ञापन प्रवक्ता डॉ जिलाजीत जैसवारा ने किया।
इसके पूर्व छात्राओ द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत गीत के माध्यम से भव्य स्वागत पुष्प वर्षा कर दी।


